ग़ज़लनुमा

तू भी दुनियादारी सीख
थोड़ी सी मक्कारी सीख

भूखा मरने से बेहतर है
करना अब गद्दारी सीख

चेहरे रोज़ बदलती दुनिया
तू भी कुछ अय्यारी सीख

सपने बुनने से क्या होगा
कोई तो दस्तकारी सीख

अपनों से मिलने से पहले
करना तेज कटारी सीख

कब तक बैठेगा पैरों में
"यादव" तू सरदारी सीख

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