बात तो बोलेगी

बात बोलेगी मुरादाबाद के चर्चित रचनाकार श्री योगेन्द्र वर्मा व्योम की सद्य प्रकाशित कृति है। जिसे गुँजन प्रकाशन, मुरादाबाद ने प्रकाशित किया है। इस कृति में देश के पन्द्रह प्रसिद्ध गीत/नवगीतकारों और शायरों के साक्षात्कार प्रस्तुत किए गए हैं। जिनमें डॉ.शिवबहादुर सिंह भदौरिया, श्री ब्रजभूषण सिंह गौतम अनुराग, श्री देवेन्द्र शर्मा इन्द्र, श्री सत्यनारायण, श्री अवधबिहारी श्रीवास्तव, श्री शचीन्द्र भटनागर, डॉ.माहेश्वर तिवारी, श्री मधुकर अष्ठाना, श्री मयंक श्रीवास्तव, डॉ.कुँवर बेचैन, श्री ज़हीर कुरैशी, डॉ.ओमप्रकाश सिंह, डॉ.राजेन्द्र गौतम, श्री आनन्दकुमार गौरव और डॉ.कृष्णकुमार राज शामिल हैं।
साक्षात्कार का सबसे महत्वपूर्ण पहलु है कि साक्षात्कार करने वाले को खुद इस बात का पूरी तरह से ज्ञान होना चाहिए कि वह सामने वाले से क्या जानना चाहता है और इसी आधार पर प्रश्रोत्तरी तैयार की जानी चाहिए। श्री योगेन्द्र व्योम ने यह कार्य पूरी दक्षता के साथ किया है। उन्होंने ने न सिर्फ देश के वरिष्ठ रचनाकारों से उनके साहित्य के संदर्भ में चर्चा की है अपितु गीत-नवगीत और $गज़ल की दशा और दिशा के बारे में भी महत्त्वपूर्ण सवाल किए हैं। वरिष्ठ रचनाकारों के साथ की गई चर्चा नये कलमकारों के पथ-प्रदर्शक का काम करेगी। नये रचनाकार और पाठक जान सकेंगे कि गीत और नवगीत में क्या अंतर है, $गज़ल और गीत-नवगीत में क्या अंतर है और इनके सृजन के लिए क्या-क्या बातें ध्यान में रखना जरूरी है कि साहित्य टिकाऊ बने।
गीत-नवगीत के भविष्य के प्रति पुरानी पीढ़ी की सोच क्या है और वे किस हद तक आश्वस्त हैं, शायर गीत के साथ और गीतकार गज़ल के साथ न्याय कर रहे हैं या नहीं, गीत के कथ्य में क्या परिवर्तन आया है, नवगीत के समक्ष क्या चुनौतियाँ हैं, हिन्दी $गज़ल को कहाँ तक सफलता मिली है आदि सवालों के जवाब श्री व्योम ने उन रचनाकारों से पूछे हैं जिनका इन विधाओं को बुलंदियों पर ले जाने में अहम योगदान है।
बात बोलेगी के माध्यम से केवल गीत और गज़ल की ही जानकारी पाठकों को नहीं मिलेगी बल्कि वरिष्ठ रचनाकारों के व्यक्तित्व और कृतित्व से भी पाठक रूबरू हो सकेंगे। अगर यह कहा जाए कि कृति हर लिहाज से एक एतिहासिक दस्तावेज बन गई है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। आकर्षक आवरण, सुन्दर और शुद्ध छपाई वाली इस 208 पृष्ठ वाली कृति का मूल्य 300 रुपये वाजिब ही कहा जाएगा। कृति पठनीय है और व्योम जी बधाई के पात्र।

-रघुविन्द्र यादव 

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