महेन्द्र जैन के बाल काव्य संग्रह 'हंसते और हंसाते जाना' का लोकार्पण

काव्य गोष्ठी का भी आयोजन

हिसार, 17 अक्तूबर (सुमन जैन सत्यगीता)| चन्दनबाला जैन साहित्य मंच के तत्वावधान में सैक्टर-13 स्थित जैन सदन के प्रांगण में गजलकार व बाल साहित्यकार महेन्द्र जैन के तीसरे बाल काव्य संग्रह 'हंसते और हंसाते जाना' का लोकार्पण नगर के वरिष्ठ साहित्यकारों व गुडग़ांव से पधारे एन.आर.सी. के पूर्व निदेशक डॉ. शैलेन्द्र द्विवेदी के कर-कमलों द्वारा हुआ। राज्यकवि उदयभानु हंस के सान्निध्य व अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. शैलेन्द्र द्विवेदी थे तथा द्विवेदी जी की धर्मपत्नी उषा द्विवेदी व एन.आई.सी. के टैक्नीकल डायरेक्टर एम.पी. कुलश्रेष्ठ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
कार्यक्रम संचालिका सुमन जैन सत्यगीता ने बताया कि इस अवसर पर द्विवेदी दम्पति के सम्मान में काव्य गोष्ठी का आयोजन भी किया गया जिसमें नगर के लगभग सभी वरिष्ठ रचानाकारों ने शिरकत की। डॉ. राधेश्याम शुक्ल की रचना की एक बानगी देखिए - 'ईंट पत्थर के शहर को हम, आदमी का शहर बनने दें।' प्रो. रघुवीर अनाम की गजल ने खूब वाहवाही लूटी - 'कोई किसी आवाज को पहचानता नहीं। अब आदमी को आदमी से वास्ता नहीं।' प्रो. कुमार रवीन्द्र ने अपने नवगीत की छटा यूँ बिखेरी- 'दूरदृष्टि से देख रहे हम घटनाओं की यही समस्या है। पोस रहे हम उल्टी-सीधी इच्छाओं को यही समस्या है।' राज्य कवि उदयभानु हंस ने भी अपने सामाजिक दायित्व को निभाते हुए गजल के माध्यम से कहा- 'मैं न मन्दिर न मस्जिद गया। कोई पोथी न बांची कभी। एक दुखिया के आंसू चुने। बस मेरी बन्दगी हो गई।' काव्य अनुरागी एम.पी. कुलश्रेष्ठ के गीत को भी खूब सराहा गया- 'मैं वहीं पर खड़ा तुमको मिल जाउंगा। जिस जगह जाओगे तुम मुझे छोडक़र।' प्रिंसीपल आई.जे. नाहल के व्यंग्यात्मक स्वर की गूंज देखिए- 'बिकाऊ लोगों की मंडी में टिकाऊ लोगों को ढूंढ रहा।' महेन्द्र जैन ने अपनी गजल के माध्यम से खुद को देश पर समर्पित करते हुए कहा- 'मेरे नाम सारे तू इल्जाम लिख दे। मुझे गम नहीं चाहे बदनाम लिख दे। है जिसकी अमानत उसी को समर्पित। मेरी जिन्दगी देश के नाम लिख दे।' सुमन जैन सत्यगीता ने भी सस्वर गजल गायन किया- 'मिलती जन्नत तो नहीं है बाद मरने के कभी। जीते-जी मर जाइए अब बात ये अच्छी लगी।'
इस अवसर पर रंजीत सिंह टाडा, विनोद शंकर गुप्त, ममता शर्मा, सरताज सिंह मुसाफिर, प्रीति जैन, साकेत जैन व हिना जैन भी उपस्थित रहे।

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