मास्टर रामअवतार के दोहे

मास्टर रामअवतार के दोहे

गाथा गाओ भूप की, मिले बड़ी जागीर।
या मर जाओ भूख से, बनकर संत कबीर।।
2
देखो आरा चल रहा, होते पेड़ हलाल।
हत्या करता माफिया, शामिल रहें दलाल।।
3
नारी की महिमा लिखी, खूब किया गुणगान।
मगर कागजों में मिला, है उसको सम्मान।।
4
ज्ञानी, ज्ञाता था बड़ा, सर्वश्रेष्ठ विद्वान।
उस रावण को अंत में, ले डूबा अभिमान।।
5
गाए जब फनकार ने, जा दरबारी राग।
पद पैसा दोनों मिले, धुले पुराने दाग।।
6
आग लगे इस आग को, जो बदले की आग।
स्वाह करे, सब कुछ हरे, सुलगें सावन फाग।।
7
वर्षा हुई किसान के, मुखड़े पर थी आब।
मगर वही दुख दे गई, बनकर के सैलाब।।
8
सच होता कड़वा बहुत, मत कह सच्ची बात।
वरना प्यारे मित्र भी, कर जाएँगे घात।।
9
जान बूझ परिवेश में, लगा रहे हम आग।
वृक्ष काट कंक्रीट के, लगा दिए हैं बाग।।
10
ऑडी गाड़ी में चलें, आलीशान मकान।
रहें बगल में रूपसी, लोग कहें भगवान।।
11
इतना भी तो मत बना, मालिक उन्हें गरीब।
लाशों को भी हो नहीं, जिनकी क$फन नसीब।।
12
रोगों की मिलती दवा, ले लेता इन्सान।
अंधभक्ति वह रोग है, जिसका नहीं निदान।।
13
भीड़ जुटी मजमा लगा, मगर सभी थे मौन।
कातिल पूछे दो बता, मार गया है कौन?
14
मर्यादा को त्याग कर, देते गहरे घाव।
वे जालिम इस दौर में, जीतें सभी चुनाव।।
15
करनी है गर नौकरी, नखरा करना छोड़।
इच्छाओं का कर दमन, गम से नाता जोड़।।
16
रक्षक ही खुद खेलते, भक्षक वाला खेल।
दीवारें बनती सदा, नारी खातिर जेल।।
17
जहाँ धर्म के नाम पर, होता धन बबार्द।
हिल जाती उस देश की, नीचे तक बुनियाद।।
18
धरती धन पोशाक का, था बेहद शौकीन।
अंत कफन से तन ढका, दो गज मिली ज़मीन।।
19
गई हमारी नौकरी, लोग पूछते हाल।
मुझको लगता घाव पर, नमक रहे हैं डाल।।
20
मिटा दिया है आपने, अब तो भ्रष्टाचार।
केवल सुविधा शुल्क है, दो के बदले चार।।
21
रूह लगी है काँपने, देख संत का भेष।
लूट ले गया अस्मिता, छोड़ी काया शेष।।
22
दुनिया को देते रहे, जीवन भर उपदेश।
संतति को ना दे सके, सुखद सत्य संदेश।।
23
खाओ गोश्त गरीब का, जैसे पूरी खीर।
प्यास मिटाओ रक्त से, धन से अगर अमीर।।






1 comment:

  1. दोहा क्रमांक 11 कफन
    दोहा क्रमांक 17 बरबाद

    टंकण त्रुटि हेतु ध्यानाकर्षण।

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